Practical

महाविद्यालय में प्रैक्टिकल रूम उपलब्ध है।

क्या आपको लगता है कि व्यावहारिक शिक्षा का छात्रों पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है? क्या आपको नहीं लगता कि चीजों को व्यावहारिक रूप से करके सीखने से अनुभव में सुधार हो सकता है? व्यावहारिक शिक्षा छात्रों को लंबे समय तक जानकारी बनाए रखने में मदद करती है। व्यावहारिक शिक्षा सुनने की तुलना में अवधारणा की समझ को बेहतर तरीके से बेहतर बनाती है। छात्र विभिन्न गतिविधियों के साथ व्यावहारिक रूप से सीखने जैसे कि बाहरी और इनडोर गतिविधियाँ, खेलना, मॉडल और संरचनाएँ बनाना, यहाँ तक कि अपने आस-पास की चीज़ों का अवलोकन करना आदि। यह करके सीखने का काफी व्यावहारिक तरीका है। इन गतिविधियों को सीखने के लिए इन्हें प्रैक्टिकल करना बेहतर विकल्प होगा। जब तक आप व्यावहारिक रूप से क्रिया नहीं करेंगे, तब तक आप तैरना, घुड़सवारी करना या क्रिकेट खेलना नहीं सीख पाएंगे। हम सभी जानते हैं कि सभी छात्रों के लिए सैद्धांतिक शिक्षा की तुलना में व्यावहारिक शिक्षा अधिक महत्वपूर्ण है। स्कूल में व्यावहारिक शिक्षा मूल रूप से प्रयोगशालाओं, अध्ययन दौरों, परियोजनाओं, असाइनमेंट आदि में प्रयोग करना है।

राजकीय महाविद्यालय अमोड़ी में शिक्षाशास्त्र विषय में प्रैक्टिकल कार्य असि0 प्रो0 श्री संजय कुमार गंगवार विभाग प्रभारी शिक्षाशास्त्र के द्वारा नियमित रूप से सम्पन्न कराया जाता है। जिसमें निम्नवत शामिल है।
प्रस्तावना कौशल, कक्षा- कक्ष प्रबंधन कौशल, श्यामपट्ट कौशल , उद्दीपन परिवर्तन कौशल.खोजपूर्ण प्रश्न कौशल,उद्देश्य कौशल, व्याख्यान कौशल आदि।